“मुँह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन,
आवाज़ों के बाज़ारों में, ख़ामोशी पहचानें कौन.”
अपने अज़ीज गज़ल गायक जगजीत सिंह के गाए इस गीत को पिछले कई वर्षों से सुनता आ रहा हूँ लेकिन सच पूछे तो इस गीत के पीछे छिपे भाव का मतलब हाल ही में समझ सका.
हुआ यूँ कि पिछले दिनों मुझे एक गाँव में रहने का मौका मिला. गाँव अंजान था. भाषाई दिक्कत्ते भी थी, जो गाँव के लोगों से बातचीत करने में रुकावट पैदा कर रही थी. ठंड से बेचैन मन सिर्फ स्थानीय भाषा न आने की वजह से सामान्य रिश्ते बनाने में आ रही कठिनाई से हैरान, परेशान था. करता क्या! चुपचाप घूमना, खाना और सोना, बस यही काम बचे थे.