March 20, 2020

निर्भया को मिला न्याय, नवरुणा को कब?





निर्भया को आज न्याय मिल गया!

पुरे 8 साल लगे। लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। दोषियों ने बचने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए। लेकिन अंततः दोषी नही बचे। दरिंदें फाँसी पर लटका दिए गए।

देश के बाकि लोगों की तरह संतोष हुआ- चलो, देश की एक बेटी को देरी से ही सही, न्याय तो मिला। मिलना भी चाहिए था। देश की राजधानी में जिस तरह एक बेटी की आबरु बेरहमी से दरिंदों ने लूटी, वह अकल्पनीय था। घटना ऐसी थी कि दानव भी सुनकर सहम जाए। पुरे देश ने एकजुटता दिखाई। शासन, प्रशासन पर दबाब बना। अपराधी पकड़े गए। लाख कोशिश हुई बचने और बचाने की, लेकिन सजा हुई। सजा न मिलती तो निराशा होती। अपराधियों के हौसले और बढ़ते।   

लेकिन जिस समय निर्भया को मिले इंसाफ़ पर हम ख़ुश हो रहे है, देश की राजधानी से सैंकड़ों किलोमीटर दूर एक ऐसा परिवार है, जो 8 साल से अपनी बेटी के वापस लौटने की बात तो छोड़िये, उसके न्याय पाने की उम्मीद भी धीरे धीरे खत्म होता देख रहा है।
बात नवरुणा के माँ-बाप की हो रही है।

January 19, 2020

दिल्ली की शिक्षा क्रांति: गिने-चुने में काम, बिल फाड़े हजार स्कूल के

दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक किताब लिखी है- शिक्षा. इस किताब में सिसोदिया लिखते है कि अलग अलग राज्यों में शिक्षा पर बहुत से काम हुए है लेकिन इनमें एक बड़ी कमी यह रह जाती है कि इन प्रयासों से अच्छी शिक्षा देने का काम 5-10 प्रतिशत बच्चों तक ही हो पाया. बाकि के 90-95 प्रतिशत बच्चों को अगर शिक्षा देने का काम हुआ भी तो वह बेहद काम चलाऊ तरीके से और खानापूर्ति के लिए ही हुआ.

सुनने में ऐसी बातें बहुत अच्छी लगती है. इस तरह की बातें सिसोदिया ही नही, केजरीवाल और उनके अन्य साथी भी करते नज़र आते है.

लेकिन गरीबों की हितैषी बताते हुए लंबी चौड़ी डिंग हांकने वाले लोगों की कथनी और करनी की असलियत कुछ और ही है.

क्या सच में दिल्ली में 5 साल चली आम आदमी पार्टी की सरकार सभी बच्चों की एकसमान चिंता करती रही? क्या सरकार की प्राथमिकता में 95 प्रतिशत स्कूल थे?